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Saharaa

उड़ती हुई घटा को बादल का सहारा मिल गया, डूबती हुई कश्ती को उसका का किनारा मिल गया! हर लफ्ज़ को मिली फिर उसकी जुबान, बस रह गए हम तो हमे खुदा का ढिकाना...