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Uljhan

उलझने ज़िन्दगी की यु उलझ सी गयी, खड़े रहे हम राहो मे और कश्तियाँ डूबती रही!   फर्क और फासला हमने बहोत करीब से देखा लहरो और समुन्दर के बीच, कश्तियाँ टकरा कर किनारो...