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Ki Tarah – A Lovable Poem

Ki Tarah – A Lovable Poem पढ़ लो मुझको ज़रा शायरी की तरह, मैं याद हर वक़्त आउंगी तुम्हे मौसकी की तरह, मत पलटो मुझे किताबों के पन्नो की तरह, तेरे अंदर बसती हूँ...