Blind Love

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Love is Blind
Love is Blind

कहते हैं प्यार अँधा होता है| क्या सच में प्यार अँधा होता है? चलिए देखते हैं इस कहानी में जो है साक्षी और समय की कहानी|

समय और साक्षी स्कूल फ्रेंड्स थे, साक्षी और समय एक दूसरे को पसंद भी करते थे| लेकिन क्या इनका मिलना आसान था? शायद यह उन दोनों को भी नहीं पता था| यह कहानी है उत्तराखंड की| समय और साक्षी एक ही स्कूल में बचपन से पढ़ते आ रहे थे साक्षी और समय दोनों ही बहुत होनहार स्टूडेंट थे| बस उन दोनों में सिर्फ इतना अंतर था कि साक्षी की हैण्ड राइटिंग बहुत ही सुन्दर थी और वही समय की राइटिंग बहुत ही बेकार| साक्षी को राइटर बनना था और समय डॉक्टर| लेकिन दोनों अपने-अपने सपनो को सच करना चाहते थे और एक दूसरे के साथ पूरी ज़िन्दगी बिताना चाहते थे|

बारिश के मौसम की बात हैं उत्तराखंड में उन दिनों भारी बारिश हो रही थी बाढ़ आ रही थी उस वक़्त समय और साक्षी दसवी क्लास के स्टूडेंट थे| बाढ़ इतनी तेज़ थी कि पूरा उत्तराखंड तहस – नहस हो गया| और उसमें साक्षी के पुरे परिवार को अलग करके रख दिया बाढ़ में पता पड़ा की साक्षी का पूरा परिवार बाढ़ की चपेट में आकर ख़त्म हो चुका है और साक्षी का भी कोई पता नहीं चल रहा था| समय ने हर जगह साक्षी की तलाश की लेकिन उसका कुछ पता नहीं पड़ा|

धीरे -धीरे ये वक़्त भी गुजरता गया….

समय, हर पल साक्षी को याद करता और भगवान से उससे मिलने की दुआ मांगता था| वक़्त के साथ समय ने अपनी आगे की पढ़ाई की और बढ़ता गया और उसको अच्छे मेडिकल कॉलेज में उसे दाखिला मिल गया| उस वक़्त भी समय साक्षी से मिलने के लिए भगवान से प्रार्थना करता कि साक्षी उसको कही और कैसे भी मिल जाये| समय कुछ सालों बाद अच्छा डॉक्टर भी बन गया| अब डॉक्टर समय को जाना था मुम्बई अपनी प्रैक्टिस के लिए|

समय प्रैक्टिस के लिए मुम्बई गए कुछ साल प्रैक्टिस करने के बाद एक बहुत अच्छे आई स्पेसलिस्ट बन गए और समय के पास दूर दूर से लोग इलाज़ करवाने आते हालाँकि समय की ऐज बहुत ज्यादा नहीं थी इसके बाद भी समय ने बहुत जल्दी अपना लक्ष्य हासिल कर लिया था| कुछ वक़्त बाद डॉक्टर समय के पास एक केस आया जिसका नाम आन्या था वो एक एक्सीडेंट में अपनी आंखें खो चुकी थी, डॉक्टर समय जब भी उसको लड़की को देखते उनको साक्षी की याद आ जाती, क्योंकि उस आन्या की आवाज बिलकुल साक्षी जैसी थी, उसका बात करने का तरीका, सब कुछ साक्षी जैसा था बस उसकी शक्ल साक्षी जैसी नहीं थी, लेकिन उसकी न देख पाने वाली आंखें भी साक्षी जैसी थी|

डॉ. समय ने उस केस को बहुत अच्छे से हैंडल किया और आन्या का अच्छे से ट्रीटमेंट स्टार्ट किया| आन्या की आँखों की रौशनी नहीं थी लेकिन आन्या हर दिन उसकी पर्सनल डायरी में कुछ लिखती थी उसका इलाज़ करते-करते ६ महीने हो गए अब डॉक्टर समय को आन्या के आँखों से वो पट्टी खोलना थी जिससे आन्या देख पाती| इसके लिए २ दिन अभी भी बाकि थे समय ने एक दिन आन्या से पूछ ही लिया तुम ये डायरी में क्या लिखती रहती हो? आन्या ने कहा कि कुछ चीज़े हैं जो मैं भुलाना नहीं चाहती| समय ने बोला ओके| जब आन्या के आँखों की पट्टी खुलने वाली थी उसके एक दिन पहले आन्या की डायरी का एक पेज गिर कर समय के पैर में पहुँच गया समय ने पेज उठाया, समय की आँखों से आंसुओं की धार निकल गयी, वही राइटिंग, वही बनावट और उस पेज पर सिर्फ इतना लिखा था आई लव यु| समय को कुछ समझ ही नहीं आ रहा था की क्या हो रहा है ये सब| क्या ये उसकी गलत फहमी है या वो आन्या की तरफ आकर्षित हो रहा है| समय ने जैसे तैसे अपने मन को समझाया|

अगले दिन आन्या के आँखों की पट्टी खुलना थी जिसके बाद आन्या ठीक भी हो सकती थी और नहीं भी| समय ने आँखों की पट्टी खोलने से पहले आन्या को एक बात बोली कि एक डॉक्टर होने के नाते में ये चाहूंगा की तुम उस इंसान को सबसे पहले देखो जिसको तुम बहुत चाहती हो| आन्या ने कहा मैं भी यही चाहती हूँ| और जैसे ही आन्या की आंखें खुली आन्या को धीरे -धीरे सब दिखाई दे रहा था और जो सबसे पहले दिखाई दिया वो थे डॉक्टर समय| आन्या उनको देखकर देखती रह गयी वो कुछ बोल ही नहीं पायी, डॉक्टर समय ने आन्या से पूछा तुम कुछ देख पा रही हो? तो उसके मुह से सिर्फ एक नाम निकला, समय| डॉक्टर समय भी अचानक चौक गए कि आन्या को तो कभी मैंने नाम नहीं बताया इसको नाम कैसे पता पड़ा| फिर आन्या ने बोला समय मैं साक्षी हूँ| समय और साक्षी दोनों की आँखों से सिर्फ आंसू निकल रहे थे वो अपनी ख़ुशी को शब्दों में नहीं बता पा रहे थे| फिर साक्षी ने बताया कि उसकी प्लास्टिक सर्जरी हुई और वो राइटर है इसलिए उसने अपना नाम आन्या रख लिया|

सही कहा गया है प्यार अँधा होता है आखिर ये दोनों मिल ही गए|

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