Love – A Sweet and Unconditional Relationship

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Unconditional Relationship

तेरी जुल्फें जो घटाओं की तरह बिखरी,
मेरी सांसे रुकीं जो तेरी परछाई निखरी|

आँचल को थामा जो साया बनाके,
समंदर से सीपों की कतारें निकली|

दरिया ये पानी का नहीं, रेत के जलजलों का है,
तू चली जाये न कहीं इसलिए ये मोहोब्बत निकली|

रियासतें तो रजबाड़ों के पास ही थीं,
हमारे दिल से बस तेरे लिए इबादत निकली|

महल मेरा ईंटों का नहीं, प्यार और जज्बातों का था,
सिर्फ तेरे कारन दुनिया के लिए बगावत निकली|

परखने का शौक बहुत था न तुझे,
देख तेरे घर के सामने से मेरी मैय्यत निकली|

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