This Poem is Dedicated for Martyr

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Dedicated for Martyr

क्यों बाट दिया है इन्सां को इस धर्म रीत की डोरी से,
देखो क्या अंजाम हुआ है भारत माँ की झोली पे,
ये समय नही है समझाने का उन दुस्टों को बोली से,
जिसने माँ की कोख उजाड़ी बारूदों की गोली से,
अब हिन्दुतान को भी हर बात पे माफ़ी देना नहीं आता,
देखो अब क्या करता है हिंन्दुस्तान जो पाकिस्तान तुझे नहीं आता!

समय नहीं है की अब बात से बात सम्हाली जाये,
समय आया है ईट की बोली पत्थर से पूरी की जाये,
देखो ज़रा गोर से उन माँ और बच्चों की आँखों मे,
और ज़रा देखो फिर उन वैवाओं की मांगो मे,
क्या ये सब देख हमारा खून खुवल नहीं जाता?
एक एक खून की बून्द का बदला लेने को मन नहीं जाता?

जय हिन्द!

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