A Poem Dedicated to Martyr’s Family

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Martyr’s Family

(शहीद की बेटी अपनी माँ से कहती है|)

माँ, पापा जल्दी आएँगे,
हमको खूब हंसाएंगे,
मुझको गोद मे उठाएंगे,
दुश्मन को मारना सिखायेंगे|

माँ, पापा जल्दी आएँगे…

हमको घुमाने ले जायेंगे,
चाट-पूरी खिलाएंगे,
झूला भी तो झुलाएंगे,
दादा-दादी को खूब सतायेंगे|

माँ, पापा जल्दी आएँगे…

मुझको मेले ले जायेंगे,
मेरी गुड़िया को सजायेंगे,
आपके साथ खाना बनवाएंगे,
मुझको अपने हाथो से खिलाएंगे|

माँ, पापा जल्दी आएँगे….

(शहीद की पत्नी अपनी बेटी को समझाते हुए कहती है|)

बेटा, पापा अब न आएँगे,
अब वो चाँद के पास जायेंगे,
सितारा बन जायेंगे,
आकाश को रोशन कर जायेंगे|

बेटा, पापा अब न आएँगे…..

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