Daughter’s Feeling

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पिता का प्यार और माँ की लोरी,

इस रिश्ते की रीत क्यों कोरी!

परायी क्यों बेटी हर होई,

क्यों न रोके जग मे कोई!

 

हर बेटी पूछे रोई-रोई,

क्यों माँ-पापा मैं पराई होई!

मैंने तो इस घर की हर नीति निभाई,

फिर भी मे क्यों पराई कहलाई!

 

जनम-मरण मेरा क्यों अलग-अलग घर होई,

क्यों इन रिश्तो मे इतनी दुरी पायी!

मैं न जाऊ दूजे घर कोई,

मैं न बनना चाहूँ बचपन घर से पराई!

 

मैं तो बनूँगी माँ की दुलारी,

मैं  तो लाना चाहूँ इस दुनिया मे सोच एक न्यारी!

पापा साथ तुम्हारा चाहूँ  ,

हाथ पकड़ फिर चलना मे चाहूँ!

 

क्यों बिता मोरा बचपन इतने जल्दी,

फिर बना दो न मुझको गुड़िया तोरी!

बस अब यही यही ज़िद है मोरी,

न करो दो एक पल मे मोहे पराई छोरी!

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