Chahat

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मेरी चाहत की दुनिया बहुत अजीब थी,
पास होकर भी तू मुझसे दूर थी,
बचपन में जैसे तरसे थे चाँद को पाने के लिए हम,
वैसे ही तुझे पाने की हसरत मेरे करीब थी,
प्यार को छुपा रखा था तुझसे हमने अपना,
पर मोहोब्बत दिखाने की कसक जरुर थी,
वो खुशबुएं तेरी जुल्फों की मेरे पास से गुजरी थी घटा बनाकर,
तेरी इन अदाओं पे मरने की वजह भी खूब थी,
मेरी चाहत की दुनिया भी बड़ी अजीब थी,
पास होकर भी तू मुझसे दूर थी…..

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