Zindgi Humne Bhi Tere Ishare Pe Jeena Seekh Liya

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ऐ ज़िन्दगी हमने भी तेरे इशारे पे जीना सीख लिया, तूने चलाया और हमने चलना सीख लिया,

मुद्दतों के बाद  मिली थी हमारी मंजिल हमे, कुछ तूने छीना कुछ हमने खोना सीख लिया!

कब तक वक़्त और मुकद्दर की सौगात देती रहेंगी ये राहें, अब क़यामत तू ही हमे सुन ले या तूने भी सुनना छोड़ दिया,

मैं अभी भी वही हु जहाँ तूने छोड़ा था मुझे, फर्क सिर्फ इतना है हमने इंतज़ार करना और तूने आगे बढ़ना सीख लिया!

 

जहाँ से बढे थे ये कदम बापस वही पे लौट आये, क्या पता ये सफर था ही अधूरा या मैंने  वो रास्ता ही छोड़ दिया,

हम तो निकले थे घर से उसे पाने के लिए, पता नहीं था हमे  की घटा ने भी मेरे साथ चलना सीख लिया!

नहीं पता ये ज़िन्दगी का खेल है या नशीब है मेरा, जो भी है उसे ही हमने अपना मानना सीख लिया,

सही कहा है किसी ने ज़िन्दगी सिखाती है कुछ नया हर पल, देखो ना ज़िन्दगी ने हमे रुलाना भी सीख लिया!

 

पास होके भी वो कभी नज़दीक ना थे, हम ही पागल थे जो उनको अपना ही समझ लिया,

तकदीर के हांथो हम इतने मजबूर हुए, हमने अपने आँखों के आँशु को पलकों से ढकना सीख लिया!

ज़िन्दगी अब उम्र कैद बन के रह गयी, उमीद ने भी रिश्तो का दामन खींच लिया,

यकीन हो गया हमे भी प्यार की गहराई पे, कहानियो मे सुना था ना की हीर ने रांझे के बिना मरना सीख लिया!

 

क्यों मजबूर हो जाती है मोहोब्बत इस दुनिया के सामने, क्यों मीरा ने कृष्ण के लिए जहर भी पीना सिख लिया,

जब सोचा बहुत हुआ तमाशा अब इस दर्द – ऐ मोहोबत का, पर रास्ता एक ही था तो हमने ठोकर ही खाना सीख़ लिया!

बस एक नसीहत मेरे दिल से यु निकलेगी सदा, फर्क होगा ये की हमने होंठो से नहीं, आँखों से कहना सीख लिया,

अश्क और आंधी मे फर्क सिर्फ इतना रहा,  हमने अश्क मे रहना और तूने आंधी मे चलना सीख लिया!

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