Truth of Life

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Truth of Life

सफर अनजान है, हाथों में सामान है,
राह है भटकी हुई, पैरों को न आराम है,
हम फिर भी चलते हैं यूँ, रास्ता नया बनाने के लिए,
सब कुछ है नया-नया, एक नया फरमान है…

दुनिया ये कुछ अजीब है, पर शब्दों में गुमान है,
हारा सा है मन मेरा, पर खुद पर मुझे अभिमान है,
कुछ अनकहे से रिश्ते है, मन मेरा परेशान है,
किस्मत मेरी मुश्किल सी है, कुछ भी न आसान है…

किसी से न उम्मीद है, गिर कर खुद उठना भी है,
बस होसलें बुलंद है, जो सोचा वही करना भी है,
हंसना भी है रोना भी है, और दुनिया से लड़ना भी है,
अपनों से दूर जाना है और अपनों के साथ रहना भी है….

ये सफर मेरा नहीं, कइयों का है सफर यही,
अपनों का साथ छोड़ कर, जिनको अपनों के लिए जीना भी है….

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