Story of Prostitutes

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किसी की अधूरी किताब हूँ मैं,
किसी के अनकहे अल्फ़ाज़ हूँ मैं,
कोई न पूरा करना चाहे मुझे,
हर रात मारा गया खवाब हूँ मैं,
बेशक इस काया मैं इंसान हूँ मैं,
पर जिस्म के भूखों का आराम हूँ मैं,
मैं मरती हूँ पल-पल हर रोज,
हस्ते हुए मुखोटे में गम का साज हूँ मैं,
हूँ में भी औरत एक,
लेकिन सम्मान की छुवन से आज़ाद हूँ मैं,
माँ दुर्गा की मूरत बनी,
मेरे घर की मिट्टी के कणो से,
पर शहर की बदनाम गलियों का ताज हूँ मैं,
बंद करो घटिया नज़रों से देखना मुझको,
किसी कारण से इस धंधे की मोहताज़ हूँ मैं….

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