Nayi Soch

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ये जरुरी तो नहीं हर शक्श को समझा जाये,

चलो आज फिर एक नयी सोच को जन्मा जाये!

 

हाथ बड़ा के शब्दों को सम्हालना सीख लो ज़रा,

पता चले कल कोई और तुमको ये समझा जाये!

 

वक़्त के पास भी आज कल वक़्त नहीं है कुछ बताने को,

ज़रा गौर खुद पे करो और सोच लो वक़्त को कैसे पलटा जाये!

 

ज़रा दर्द दुसरो का महसूस तो करके देखो,

फिर बड़ो उन हाथो को रोकने जो गलत काम के लिए बढ़ाया जाये!

 

नयी सोच के साथ हिम्मत भी जरुरी है अब तो,

क्या पता कल कोई गिद्ध फिर शेर की तरफ चला आये!

 

बहुत जरुरी हुआ सम्हालना इस जहाँ को अब,

हर छोटे से कदम को ज़रा बङाया जाये!

 

हर तरफ, हर कदम पर लूटने वालो की है भीड़ यहाँ,

ज़रा सम्हाल के हर एक चहरे को पहचाना जाये!

 

ये जरुरी तो नहीं हर शक्श को समझा जाये,

चलो आज फिर एक नयी सोच को जन्मा जाये!

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