Listen the Words of Life

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Words of Life

खामोश होकर भी ज़िन्दगी न जाने क्या-क्या सवाल करती है,
कभी अपनी तो कभी परायों की बात करती है,
फिर कहती है, मैं भी तो औरों की तरह बेवफा हूँ,
कल तुझे मौत के हवाले छोड़ जाना है!

फिर क्यों लोग ज़िन्दगी से इतना प्यार करते हैं,
क्यों किसी की याद मैं आंखें भिगोये रहते हैं,
क्यों किसी के बारे मैं बुरा सोचते हैं,
क्यों किसी से दिल लगाए रहते हैं!

क्यों प्यार दोस्ती और न जाने कितने ही रिश्ते,
जो अनजाने से होते हैं, बनाये चले जाते हैं,
क्या हम भी उन्हें उतना ही तड़फाएँगे, जितना वो हमे तड़फते हैं,
जुड़ा होकर भी ज़िन्दगी से न दिल से जुदा हो पाते हैं!

खामोश होकर भी ज़िन्दगी न जाने क्या-क्या सवाल करती है,
कभी अपनी तो कभी परायों की बात करती है………………………

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