Koshish Mai- Reality of Life

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Koshish Mai

हर कोई इस भीड़ मे कुछ पाने की कोशिश मे,
चल पड़े हैं सब, लेने की कोशिश मे|

देना नहीं सीखा, न देने की पहल की,
हर कोई है, एक-दूसरे को गिराने की कोशिश मे|

क्या मिलेगा इससे, कोई समझना चाहे न,
चले जा रहे, सब दूसरों को पीछे करने की कोशिश मे|

होड़ ने इस जहाँ से इंसानियत मिटा दी,
गरीब रोटी पाने और अमीर पैसे पाने की कोशिश मे|

मिटना है राख जैसे, फिर काहेका गुरुर है,
क्यों लगे हैं सब सबको मिटाने की कोशिश मे|

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