A Life of Love

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Life of Love

सिर्फ तन्हाइयों के आलम से न गुजरे ये ज़िन्दगी,
ले काफिला चले हम, बिताने ये ज़िन्दगी,
रुकी हुई सी सांसे, थमे हुए से लम्हे,
कायनात की फलक से उड़ा दें ये ज़िन्दगी!

धुआं – धुआं सा लगने लगा था ये आसमा मुझे,
कैसे कहे किसकी अमानत है ये ज़िन्दगी,
परछाइयां कभी अलग तो कभी साथ थीं,
यही रहा आलम मेरी ज़ुस्तज़ू का ज़िन्दगी!

दिए भी जलाये थे, शमा पिघली हुई भी थी,
हर सख्श के हाथों बिकी हुई थी ज़िन्दगी,
किनारों के साहिलों पे रुक गयी मेरी कश्ती,
कैसे कहु तूने कितना रुलाया ज़िन्दगी!

खफा नहीं हु मै तुझसे, मगर नाराज़ फिर भी हूँ,
अपनी ही बनके धोखा जो दिया है ज़िन्दगी,
बंद मुठी की तो सब कुछ सिमट गया,
डरती हूँ खुल कर सब बिखर न जाये ज़िन्दगी!

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