Intzaar (Waiting but Still Alone)

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Intzaar

सवालो मे उलझी रहीं यू आँखें मेरी,
पलकों को उठा के ज़रा देखा भी नहीं|

बेवजह रह गया इंतज़ार मेरा उसके लिए,
जब गुजरा वो सामने से तो हमे खबर ही नहीं|

पास जब आया वो मेरे कई ज़माने क बाद,
पर अब उसको खुद के पास लौटाने की कोई वजह ही नहीं|

न दिल समझ पाया और न मै समझ पाया क्या हुआ मुझे,
कि अब दिल मे की कोई हसरत ही नहीं|

गिला न कर मुझसे ये मौसम अजीब है,
मेरी बफाओ का अब मेरे पास ही सिलसिला नहीं|

वक़्त ने गम भरे नहीं कुरेदे हैं मेरे,
फिर तेरा प्यार पाने का मुझमे अब हौसला नहीं|

किस्मत कि आजमाइश, तारीके पलटती गयी,
मुझे होश मे लेन कि अब कोई दवा नहीं|

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