DHOKHA

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DHOKHA

आज फिर कुछ लिखने का दिल कर गया मेरा,
दर्द कलम से पन्नों पर उतर गया मेरा,

हिल गयी है बुनियाद कुछ रिश्तों की,
दिल में हर गम दफ़न हो गया मेरा ,

आज फिर कुछ लिखने का दिल कर गया मेरा,
दर्द कलम से पन्नों पर उतर गया मेरा,

हसीं हों कुछ पल ज़िंदगी के मेरी,
ये सपना भी आँखों से निकल गया मेरा,

न दुआ में उठे हाथ मेरे, न बफाओं ने दिया साथ मेरा,
मेरा खुद का ही भरोसा, विश्वास छल गया मेरा,

आज फिर कुछ लिखने का दिल कर गया मेरा,
दर्द कलम से पन्नों पर उतर गया मेरा…..

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