Teri Ankhon Mai

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मैंने तेरी आँखों मैं अपनी परछाई देखि है,
तेरे आंशुओं मैं प्यार की गहराई देखि है!

वकत लगा ये समझते समझते मुझको,
पर अब मैंने तेरी बातों की सच्छाई देखि है!

महसूस किया है तेरे हर दर्द के आलम को,
तेरी धड़कनो की खनक मे मेरी सांसों की बेताबी देखि है!

मेरी तन्हाई से मेरा दर्द यू जुड़ा सा रहा था,
अब जागी हूँ मे तो तेरी बफाई देखि है!

इस सन्नाटे मे जुगनुओं की आहट तो सुनो,
लगा कुछ ऐसे जैसे बिना बारिश ही बूंदों की सदा देखि है!

दिल के दरवाजों पे ये क्यों एक दःतक सी हुई,
कोई सच मे था ये मैंने खुद की अदा देखि है!

आईने मे जब खुद को कई बार देखा मैंने,
लगा मुझे जैसे मैंने तेरी परछाई देखि है!

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