Old Book

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ज़रा सोच कर पढ़िए किसी पुरानी पड़ी किताब को,
क्योकि…
पुरानी किताब के जिस दिन पन्ने खुलते हैं,
अक्सर वो इतिहास बयां कर जाते हैं…
कभी रुला जाते हैं कभी हंसा जाते हैं,
कभी गमो को भी भुला जाते हैं,
कभी मिला देते हैं कुछ बिछड़े हुओं को वो,
कभी आंसू बनके यादों को बहा जाते हैं,
कभी बन जाते है तन्हाई का सहारा,
कभी किसी के पास होने का असर दिखा जाते हैं,
कभी मशहूर कर जाते हैं एक छोटी सी हस्ती को पलों में,
किसी को एक तरह से बदनाम भी कर जाते हैं,

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