Life of Women

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Life of Women
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Life of Women

सपना:

कल रात मैंने एक सपना देखा,
सपनो में आसमानों में खुद को परियों सा देखा,
दिल घबराया, डर घिर आया,
जब वहाँ पापा-मम्मी का साथ नहीं पाया,
दूरी क्या होती है तब समझ आया,
टूटते ही सपना माँ-पापा को गले लगाया,
यहीं नहीं रुका सिलसिला मेरे सपनो का,
बेटी हूँ न, तो हकीकत में एक और जन्म पाया,
थोड़ा सा सपने से ये रूप अलग गहराया,
बेटी से अब बहु का सफर था साथ आया,
एक नया सपना था ससुराल अब घर अपना था,
इसके आगे का सफर लम्बा था, हमसफ़र पर यकीन करना था,
आसान न थी डगर पर कठिन भी न था ये सफर,
चलते चले जाना था सबको अपना बनाना था,
पिछले घर को भूल कर एक नए घर को अब सजाना था,
चलते चले जाना था बस चलते चले जाना था………

हकीकत:

ये सोच कर मन घबराता है,
लेकिन यह हर नारी की परिभाषा है…….

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