Kahan Se Laaun

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Kahan Se Laaun

दिल को तस्सली देने वाले वो अल्फ़ाज़ कहाँ से लाऊं,
जो रूह मैं बस जाये वो प्यार कहाँ से लाऊं |

सिमटी हुई खुसबू तेरी अब भी मेरे जहन मैं है,
रुकी हुई उन यादों का फरमान कहाँ से लाऊं |

तनहा हुए तेरी मोहोब्बत की राहों से हम,
मुझे मेरी पहचान दिलाने वाला तेरा अक्श कहाँ से लाऊं |

दरमियान मिटे हुए थे जो फांसले तेरे – मेरे,
उन फांसलों की लूटी हुई सौगात कहाँ से लाऊं |

तेरी छुवन से उठी सरसराहट मेरी धड़कन मैं थी,
बता मुझे तेरी अनछुई उस छुवन की बरसात कहाँ से लाऊं |

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