Story of Broken Heart

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Broken Heart

किस रिश्ते पे भरोसा करु समझ नहीं आता,
हर कोई हुस्न का तलबगार लगता है!
एक ही पल मे बिखर के रह गयी मेरी दुनिया,
पता चला जो उसके दिल मे भी परियों का बाजार लगता है!

क्या हुआ ये कुछ समझ नहीं आया अब तक,
टूटे हुए सपनो को क्यों आइना बार-बार रखता है!
नहीं करना मोहोब्बत दिल मेरा टुटा हुआ कहे,
जिसे देखो वो दिल तोड़ने का औजार रखता है!

एक जुस्तजू मे क्यों मैं उलझती चली गयी,
अब समझ आया क्यों जुदाई मे दिल जार – जार लगता है!
न जीने की ख्वाहिश है मेरे दिल मे, न मारने की वजह ढूंढ पायी,
जहा देखो वहाँ उसकी परछाई का इंतज़ार लगता है!

किस रिश्ते पे भरोसा करु समझ नहीं आता,
हर कोई हुस्न का तलबगार लगता है!
एक ही पल मे बिखर के रह गयी मेरी दुनिया,,
पता चला जो उसके दिल मे भी परियों का बाजार लगता है!

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