Rape

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बलात्कार

जिसने जैसा सोचा वैसा,
बलात्कार को ढाल दिया,
किसी ने इसको छोटे कपड़ो,
किसी ने साड़ी में बांध दिया,

किसी ने ऊँगली की चाल-चलन पर,
बातों से भी इज्जत को उछाल दिया,
किसी ने दिए ताने माँ बाप को,
बस लड़की को बदनाम किया,

एक-एक कानून बनाकर लड़कियों पर थोप दिया,
घर से लड़की न बाहर जाये, पढ़ने से भी रोक दिया……

मैं नहीं डरती किसी से,
मेरी एक बगावत है,
समाज को अपनी सोच और
निगाहें बदलने की जरुरत है,
मेरा एक सवाल है सबसे,
क्यों खुद के घर की लड़की सुरक्षित है?
इस देश की हर लड़की क्या नहीं देश की इज़्ज़त है?
थोड़ी शर्म अगर बाकि है,
सुधरो और सुधार करो,
भीख नहीं मांगना इज़्ज़त की,
सीधे-सीधे प्रहार करो….

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