A Poem for Father Behalf of Daughter

0
961 views
Poem For Father Behalf of Daughter
@GoogleImages

Poem For Father

पापा फिर आ जाओ न, वो झूला-झुला जाओ न,
देखो मैं अभी भी छोटी हूँ, वो बचपन लौटा जाओ न |

याद आपकी आयी है, क्यों बेटी कर दी परायी है,
मेरा घर आँगन वो भी है, वो बचपन घर दे जाओ न |

क्यों बेड़ियाँ बंधी हुई हैँ, सासरे हर पल करे रुसवाई हैँ,
परियों जैसा पाला आपने, क्यों अब नौकर जैसी मेरी परछाई है,
रोना कोई देखे न मेरा, पाप मुझको बापस ले जाओ न |

देखो कितना सब डाँटें मुझको, सब पैरों मैं राखें मुझको,
प्यार अपना पापा बरसाओ न, मुझको मेरी पहचान दिलाओ न |

मैंने तो हर फ़र्ज़ निभाया, फिर क्यों मनहूसः कही जाती हूँ,
आपके संस्कार हैँ मुझमे, सब कुछ चुपचाप सह जाती हूँ,
पापा फिर आ जाओ न, वो झूला-झुला जाओ न |

Leave a Reply