Tuesday, June 19, 2018

Compromise

समझौते की लहर समझौता भी था समझ भी थी, मोहोब्बत में तेरी खनक भी थी, डूबा हुआ था रिश्ता तेरा मेरा, लेकिन बचाने की इसको गरज भी थी, कोई नहीं जो हम हुए हैं अलग, जब साथ थे तब महक भी थी, थोड़ा तुम रुक जाते...
शिद्दत से चाहत कुछ नहीं होती, चाहत से शिद्दत है अब तो, गए वो ज़माने जब प्यार होता था निगाहों से, Royal Status पर आकर सब थम गए अब तो, पहले का प्यार हुआ करता था कृष्णा और राधा जैसा, Jaguar देख कर मोहोब्बत...
एक सपना था मेरा, क़ि सिर्फ मुझे तुम जीतो, क्या पता था इस जीत में, तुमको जिता कर हम ही हार जायेंगे, फिर सोचा क़ि सिर्फ तुम ही, मेरे आंसुओं को पोछो, क्या पता था, वो आंसू देने वाले तुम ही होगे, फिर सोचा कि, तुम्हें याद करने...
मैंने तो तेरा साथ दिया, तूने अकेला क्यों छोड़ा है कैसे बताऊ मैं तुझको, हर एक सपना अधूरा है पल-पल जो आंसू हैं दिए, वो तो मैंने पोंछ लिए, टूटे हुए सपनो को लेकर, मैं बापस फिर न आउंगी..... मैं अब न किसी को चाहूंगी.....
कुछ बेबुनियाद सी उम्मीद, कुछ अनकहे से शब्द, कुदरे हुए कुछ जख्म, आदतों के कुछ घेरे, बेपनाह मोहोब्बत का वादा, बिखरे हुए से कुछ रिश्ते, टुटा फूटा ये दिल, दिल के पिंजरे में बंद धड़कन, उड़ान भरने को बेताब से सपने, पर बिना पंख सब है मुश्किल, छोटा सा...

Decided Path

अब कुछ नहीं, बस चुप रहना चाहती हूँ, मोहोब्बत में नहीं, गम में जीना चाहती हूँ, बेपनाह नहीं, बेवजह ज़िंदगी चाहती हूँ, किसी और की नहीं, खुद की जरुरत बनना चाहती हूँ रोना नहीं, रुलाना चाहती हूँ, याद करना नहीं चाहती, खुद किसी को याद आना चाहती हूँ....

Life and Me

मेरे ज़िंदगी से सवाल: कैसे - कैसे ख्वाब तूने दिखाए ज़िंदगी, जो कभी हंसाये कभी रुलाये ज़िंदगी, प्यार में हमेशा क्यों धोखा ही मिला ज़िंदगी? तू ही सम्हाल मैं तो बिखरी ज़िंदगी, क्या रह गयी कमी मोहोब्बत में ज़िंदगी, हर वक़्त क्यों तूने आजमाया ज़िंदगी? ज़िंदगी...

Dard-E-Mohobbat

दर्द ऐ मोह्हबत जो आया है वो जरूर जायेगा, मोहोब्बत का हर फ़र्ज़ जरूर निभाएगा, कभी वादों से अपने तुमको लुभाएगा वो, कभी उम्मीद दे कर अपना तुमको बनाएगा वो, कभी बनेगा वजह हंसी तुम्हारे होंठों की, कभी आँसूं पलकों से पौंछ जायेगा वो, कभी रूठेगा...

DHOKHA

DHOKHA आज फिर कुछ लिखने का दिल कर गया मेरा, दर्द कलम से पन्नों पर उतर गया मेरा, हिल गयी है बुनियाद कुछ रिश्तों की, दिल में हर गम दफ़न हो गया मेरा , आज फिर कुछ लिखने का दिल कर गया मेरा, दर्द कलम...
किसी की अधूरी किताब हूँ मैं, किसी के अनकहे अल्फ़ाज़ हूँ मैं, कोई न पूरा करना चाहे मुझे, हर रात मारा गया खवाब हूँ मैं, बेशक इस काया मैं इंसान हूँ मैं, पर जिस्म के भूखों का आराम हूँ मैं, मैं मरती हूँ पल-पल हर...

Clear Intention

तेरी गलियों में फिर आने का कोई इरादा तो नहीं है, लेकिन तुझे छोड़ के जाने का भी कोई वादा नहीं है, इस डूबती कश्ती का कोई सहारा तो नहीं है, पार लगा दे पार कोई ऐसा समंदर का इशारा भी नहीं...

Chahat

मेरी चाहत की दुनिया बहुत अजीब थी, पास होकर भी तू मुझसे दूर थी, बचपन में जैसे तरसे थे चाँद को पाने के लिए हम, वैसे ही तुझे पाने की हसरत मेरे करीब थी, प्यार को छुपा रखा था तुझसे हमने अपना, पर मोहोब्बत...
न कही सुकून था, न कोई जूनून था, ज़िंदगी ने ऐसी राहों पे ला खड़ा किया, संग न था कोई अब, तन्हा सी थी हर डगर भी अब, पास ला कर ज़िंदगी ने दूर जो ज़रा किया, क्या कहे-किससे कहें, कब कहें-कैसे कहें, हर...

Old Book

ज़रा सोच कर पढ़िए किसी पुरानी पड़ी किताब को, क्योकि... पुरानी किताब के जिस दिन पन्ने खुलते हैं, अक्सर वो इतिहास बयां कर जाते हैं... कभी रुला जाते हैं कभी हंसा जाते हैं, कभी गमो को भी भुला जाते हैं, कभी मिला देते हैं कुछ...

Truth of Life

Truth of Life सफर अनजान है, हाथों में सामान है, राह है भटकी हुई, पैरों को न आराम है, हम फिर भी चलते हैं यूँ, रास्ता नया बनाने के लिए, सब कुछ है नया-नया, एक नया फरमान है... दुनिया ये कुछ अजीब है, पर...
Expectation and Reality of Women मैं बेटी हूँ सबसे एक आस लगाए बैठी हूँ, सम्मानों की हर जन से मैं अरमान जगाये बैठी हूँ, तिनके सी थी, बड़ी हुई फिर उम्मीदों की प्याली सी मैं, बाबा की मैं गुड़िया थी, और माँ के...
Life of Women

Life of Women

Life of Women सपना: कल रात मैंने एक सपना देखा, सपनो में आसमानों में खुद को परियों सा देखा, दिल घबराया, डर घिर आया, जब वहाँ पापा-मम्मी का साथ नहीं पाया, दूरी क्या होती है तब समझ आया, टूटते ही सपना माँ-पापा को गले लगाया, यहीं नहीं...
यह कविता आरक्षण के खिलाफ है, आप सभी से निवेदन है कि इसको व्यक्तिगत तौर पर न ले| और अगर इस कविता से सहमत हों तो इसको शेयर जरूर करें| जय हिन्द| आरक्षण आरक्षण के खिलाफ एक आवाज उठाना चाहते हैं, हम...
Poverty

Poverty

Poverty यह कविता उन बच्चों की गाथा है जो सड़को पर भीख मांगते हैं| कभी-कभी भीख मांगना उनकी मज़बूरी होती है और कभी - कभी भीख मांगना उनकी आदत| लेकिन मैं यहाँ उन मजबूर बच्चों की सोच को अपनी कविता...
Ye Raste Hain Pyar Ke
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