Author: Darshana Bhawsar

Story of Many Daughter 0

Story of Many Daughter

Story of Many Daughter बेटी घर -मायका…….. घर का आंगन छोड़ चली वो बागों में त्योहारों में, याद उसे भी कर लेना सुबह-दिन के उज्यारों में, बेटी घर से बिदा होगी जब डोली के...

सदमा 0

सदमा

साजिशों से बचे तो, सदमों ने घेर लिया, प्यार में हमसे, अपनों ने ही मुह मोड़ लिया,

Reservation 0

आरक्षण

यह कविता आरक्षण के खिलाफ है, आप सभी से निवेदन है कि इसको व्यक्तिगत तौर पर न ले| और अगर इस कविता से सहमत हों तो इसको शेयर जरूर करें| जय हिन्द| आरक्षण आरक्षण...

Poverty 0

Poverty

Poverty यह कविता उन बच्चों की गाथा है जो सड़को पर भीख मांगते हैं| कभी-कभी भीख मांगना उनकी मज़बूरी होती है और कभी – कभी भीख मांगना उनकी आदत| लेकिन मैं यहाँ उन मजबूर...

Sanam Re 0

Sanam Re

Sanam Re जिसे देख कर खुश होने के बहाने ढूढ़ता था दिल उसके दिल में मेरे लिए थोड़ी सी जगह भी ना थी … मेरी हर सोच में सिर्फ वो ही था उसको मेरी...